श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.17.54 
ततो गुरुगृहे बाल: स वसन्बालदानवान‍्।
अध्यापयामास मुहुरुपदेशान्तरे गुरो:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तब प्रह्लाद अपने गुरु के पास रहकर उनसे शिक्षा पाकर अन्य राक्षस पुत्रों को बार-बार उपदेश देने लगे ॥54॥
 
Then Prahlada, while staying with his Guru, after having been taught by him, began giving sermons repeatedly to the other demon sons. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)