श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.17.53 
श्रीपराशर उवाच
एवमभ्यर्थितस्तैस्तु दैत्यराज: पुरोहितै:।
दैत्यैर्निष्कासयामास पुत्रं पावकसञ्चयात्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - पुरोहितों के इस प्रकार प्रार्थना करने पर दैत्यों के राजा ने दैत्यों द्वारा प्रह्लाद को अग्नि से बाहर निकलवाया।
 
Sri Parashara said - After the priests prayed in this manner, the king of demons got Prahlada taken out of the fire by the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)