श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.17.51 
बालत्वं सर्वदोषाणां दैत्यराजास्पदं यत:।
ततोऽत्र कोपमत्यर्थं योक्तुमर्हसि नार्भके॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! बचपन सब प्रकार के दोषों का निवास है, इसलिए आपको इस बालक पर अधिक क्रोध नहीं करना चाहिए ॥ 51॥
 
O King of Demons! Childhood is the abode of all kinds of faults, therefore you should not show extreme anger towards this child. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)