श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.17.45 
हिरण्यकशिपुरुवाच
ज्वाल्यतामसुरा वह्निरपसर्पत दिग्गजा:।
वायो समेधयाग्निं त्वं दह्यतामेष पापकृत्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा - हे दैत्यों! तुम चले जाओ। दैत्यों! तुम अग्नि जलाओ, और हे वायु! तुम अग्नि जलाओ, जिससे यह पापी जल जाए॥45॥
 
Hiranyakshipu said – Hey giants! You go away. Demons! You light the fire, and O wind! You light the fire so that this sinner can be burnt. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)