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vishnu 1.17.43: परन्तु श्रीगोविन्द का स्मरण करने के कारण उसके वक्षस्थल से हजारों हाथी के दांत टकराकर टूट गए। तब उसने पिता हिरण्यकशिपु से कहा- 43॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.17.43 
स्मरतस्तस्य गोविन्दमिभदन्ता: सहस्रश:।
शीर्णा वक्ष:स्थलं प्राप्य स प्राह पितरं तत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु श्रीगोविन्द का स्मरण करने के कारण उसके वक्षस्थल से हजारों हाथी के दांत टकराकर टूट गए। तब उसने पिता हिरण्यकशिपु से कहा- 43॥
 
But due to remembering Shri Govind, thousands of elephant's teeth collided with his chest and broke. Then he said to father Hiranyakashipu - 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)