श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.17.37 
हिरण्यकशिपुरुवाच
भो भो सर्पा: दुराचारमेनमत्यन्तदुर्मतिम्।
विषज्वालाकुलैर्वक्त्रै: सद्यो नयत सङ्क्षयम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा - हे सर्प! इस अत्यंत मूर्ख और दुष्ट को अपने विषभरे मुखों से काटकर शीघ्र ही नष्ट कर दो॥37॥
 
Hiranyakashipu said – Hey snake! Destroy this extremely foolish and wicked person quickly by biting him with your venom-filled mouths. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)