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vishnu 1.17.34: श्री पराशर जी बोले - तब सैकड़ों राक्षसों के अस्त्र-शस्त्रों से प्रहार होने पर भी उसे किंचित मात्र भी पीड़ा नहीं हुई, वह पहले जैसा ही शक्तिशाली बना रहा।   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.17.34 
श्रीपराशर उवाच
ततस्तैश्शतशो दैत्यै: शस्त्रौघैराहतोऽपि सन्।
नावाप वेदनामल्पामभूच्चैव पुनर्नव:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - तब सैकड़ों राक्षसों के अस्त्र-शस्त्रों से प्रहार होने पर भी उसे किंचित मात्र भी पीड़ा नहीं हुई, वह पहले जैसा ही शक्तिशाली बना रहा।
 
Shri Parashar Ji said - Then despite being attacked by the weapons of hundreds of demons he did not feel even the slightest pain; he still remained as powerful as before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)