श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.17.33 
प्रह्लाद उवाच
विष्णु: शस्त्रेषु युष्मासु मयि चासौ व्यवस्थित:।
दैतेयास्तेन सत्येन माक्रमन्त्वायुधानि मे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लादजी बोले - हे दैत्यों! भगवान विष्णु सर्वत्र अस्त्रों में, तुममें और मुझमें विद्यमान हैं। इस सत्य के प्रभाव से इन अस्त्रों का मुझ पर कोई प्रभाव नहीं होना चाहिए। 33॥
 
Prahladji said – Hey demons! Lord Vishnu is present everywhere in the weapons, in you and in me. Due to the influence of this truth, these weapons should have no effect on me. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)