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vishnu 1.17.31: हिरण्यकशिपु ने कहा - अरे! वह बड़ा दुष्टात्मा है। उसे मार डालो; अब उसके जीने से कोई लाभ नहीं है, क्योंकि वह अपने ही पक्ष का अहित करने वाला होकर अपने कुल के लिए जलते हुए अंगारे के समान हो गया है।   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.17.31 
हिरण्यकशिपुरुवाच
दुरात्मा वध्यतामेष नानेनार्थोऽस्ति जीवता।
स्वपक्षहानिकर्तृत्वाद्य: कुलाङ्गारतां गत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा - अरे! वह बड़ा दुष्टात्मा है। उसे मार डालो; अब उसके जीने से कोई लाभ नहीं है, क्योंकि वह अपने ही पक्ष का अहित करने वाला होकर अपने कुल के लिए जलते हुए अंगारे के समान हो गया है।
 
Hiranyakashipu said - Oh! He is a very evil soul. Kill him; now there is no use in his living, because being a harmer of his own side, he has become like a burning ember for his clan. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)