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vishnu 1.17.27: हिरण्यकशिपु ने कहा, "इस पापी को यहाँ से हटाकर इसके गुरु के पास ले जाओ और इसका अच्छा शासन करो। कौन जाने किसने इस दुष्ट को मेरे विरोधी की प्रशंसा करने के लिए नियुक्त किया है?"   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.17.27 
हिरण्यकशिपुरुवाच
निष्कास्यतामयं पाप: शास्यतां च गुरोर्गृहे।
योजितो दुर्मति: केन विपक्षविषयस्तुतौ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा, "इस पापी को यहाँ से हटाकर इसके गुरु के पास ले जाओ और इसका अच्छा शासन करो। कौन जाने किसने इस दुष्ट को मेरे विरोधी की प्रशंसा करने के लिए नियुक्त किया है?"
 
Hiranyakashipu said, "Remove this sinner from here and take him to his Guru and rule him well. Who knows who has appointed this wicked man in praise of my opponent?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)