Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.17.26: प्रह्लादजी बोले - पिताश्री! भगवान विष्णु केवल मेरे हृदय में ही नहीं, अपितु समस्त लोकों में विद्यमान हैं। वे सर्वव्यापी हैं और मुझे, आपको तथा समस्त जीवों को उनके-उनके कर्मों में प्रेरित करते हैं॥ 26॥ | vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रह्लाद उवाच
न केवलं मद्धृदयं स विष्णु-
राक्रम्य लोकानखिलानवस्थित:।
स मां त्वदादींश्च पितस्समस्ता-
न्समस्तचेष्टासु युनक्ति सर्वग:॥ २६॥
अनुवाद
प्रह्लादजी बोले - पिताश्री! भगवान विष्णु केवल मेरे हृदय में ही नहीं, अपितु समस्त लोकों में विद्यमान हैं। वे सर्वव्यापी हैं और मुझे, आपको तथा समस्त जीवों को उनके-उनके कर्मों में प्रेरित करते हैं॥ 26॥
Prahladji said - Father! Lord Vishnu is not only present in my heart, but is also present in all the worlds. He is omnipresent and motivates me, you and all living beings in their respective activities.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥