Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.17.25: हिरण्यकशिपु ने कहा, "इस मूर्ख बालक के हृदय में कौन सा पाप प्रवेश कर गया है, जिसके कारण इसका मन इस प्रकार ग्रस्त हो गया है और यह ऐसे बुरे वचन बोल रहा है?" | vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिरण्यकशिपुरुवाच
प्रविष्ट: कोऽस्य हृदये दुर्बुद्धेरतिपापकृत्।
येनेदृशान्यसाधूनि वदत्याविष्टमानस:॥ २५ ॥
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा, "इस मूर्ख बालक के हृदय में कौन सा पाप प्रवेश कर गया है, जिसके कारण इसका मन इस प्रकार ग्रस्त हो गया है और यह ऐसे बुरे वचन बोल रहा है?"
Hiranyakshipu said, "Which sinner has entered the heart of this foolish boy, due to whom his mind is possessed and he is uttering such evil words?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥