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vishnu 1.17.24: प्रह्लाद बोले, "हे प्रिय! वे ब्रह्मभूत विष्णु केवल मेरे ही नहीं, समस्त प्रजा के तथा तुम्हारे भी रचयिता, नियन्ता और ईश्वर हैं। प्रसन्न हो जाओ, व्यर्थ क्रोध क्यों कर रहे हो?"   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.17.24 
प्रह्लाद उवाच
न केवलं तात मम प्रजानां
स ब्रह्मभूतो भवतश्च विष्णु:।
धाता विधाता परमेश्वरश्च
प्रसीद कोपं कुरुषे किमर्थम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, "हे प्रिय! वे ब्रह्मभूत विष्णु केवल मेरे ही नहीं, समस्त प्रजा के तथा तुम्हारे भी रचयिता, नियन्ता और ईश्वर हैं। प्रसन्न हो जाओ, व्यर्थ क्रोध क्यों कर रहे हो?"
 
Prahlada said, "O dear! That Brahmabhuta Vishnu is not only my creator, controller and God, but also of all the people and you. Be happy, why are you getting angry in vain?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)