श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.17.23 
हिरण्यकशिपुरुवाच
परमेश्वरसंज्ञोऽज्ञ किमन्यो मय्यवस्थिते।
तथापि मर्तुकामस्त्वं प्रब्रवीषि पुन: पुन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा, "अरे मूर्ख! मेरे रहते और किसे परमेश्वर कहा जा सकता है? फिर भी तू मृत्यु के मुख में जाने की इच्छा से इस प्रकार बक-बक कर रहा है।"
 
Hiranyakashipu said, "Oh fool! Who else can be called the Supreme Lord when I am here? Still you keep on blabbering like this with the desire to go to the mouth of death."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)