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vishnu 1.17.22: प्रह्लाद बोले, "योगियों का परम धाम, जिसका ध्यान करना योग्य है, वह वाणी का विषय नहीं हो सकता, जिनसे यह जगत प्रकट हुआ है और जो स्वयं जगत के स्वरूप हैं, वे परब्रह्म भगवान विष्णु हैं।"   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.17.22 
प्रह्लाद उवाच
न शब्दगोचरं यस्य योगिध्येयं परं पदम्।
यतो यश्च स्वयं विश्वं स विष्णु: परमेश्वर:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, "योगियों का परम धाम, जिसका ध्यान करना योग्य है, वह वाणी का विषय नहीं हो सकता, जिनसे यह जगत प्रकट हुआ है और जो स्वयं जगत के स्वरूप हैं, वे परब्रह्म भगवान विष्णु हैं।"
 
Prahlada said, "The supreme abode of the Yogis, whose meditation is worthy, cannot be the subject of speech, from whom the universe has appeared and who is himself the form of the universe, is the Supreme Lord Vishnu." 22
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)