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vishnu 1.17.20: प्रह्लादजी बोले- पिताश्री! हमारे हृदय में निवास करने वाले भगवान विष्णु ही सम्पूर्ण जगत के गुरु हैं। उन परमात्मा के अतिरिक्त और कौन किसी को कुछ सिखा सकता है?॥ 20॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.17.20 
प्रह्लाद उवाच
शास्ता विष्णुरशेषस्य जगतो यो हृदि स्थित:।
तमृते परमात्मानं तात क: केन शास्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लादजी बोले- पिताश्री! हमारे हृदय में निवास करने वाले भगवान विष्णु ही सम्पूर्ण जगत के गुरु हैं। उन परमात्मा के अतिरिक्त और कौन किसी को कुछ सिखा सकता है?॥ 20॥
 
Prahladji said— Father! Lord Vishnu residing in our hearts is the teacher of the whole world. Who else can teach anything to anyone except that Supreme Being?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)