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vishnu 1.17.18: गुरु ने कहा, "हे राक्षसराज! आपको क्रोध नहीं करना चाहिए। आपका यह पुत्र वह नहीं कह रहा है जो मैंने उसे सिखाया है।"   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.17.18 
गुरुरुवाच
दैत्येश्वर न कोपस्य वशमागन्तुमर्हसि।
ममोपदेशजनितं नायं वदति ते सुत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
गुरु ने कहा, "हे राक्षसराज! आपको क्रोध नहीं करना चाहिए। आपका यह पुत्र वह नहीं कह रहा है जो मैंने उसे सिखाया है।"
 
The Guru said, "O demon king! You should not be overcome by anger. This son of yours is not saying what I have taught him." 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)