श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.17.16 
श्रीपराशर उवाच
एतन्निशम्य दैत्येन्द्र: सकोपो रक्तलोचन:।
विलोक्य तद‍्गुरुं प्राह स्फुरिताधरपल्लव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - यह सुनकर दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने क्रोध से लाल आंखें करके प्रह्लाद के गुरु की ओर देखा और कांपते हुए होठों से कहा।
 
Shri Parashara said - On hearing this, king of demons Hiranyakashipu, with his eyes red with anger, looked at Prahlad's guru and said with trembling lips.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)