vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित
»
श्लोक 14
श्लोक
1.17.14
प्रह्लाद उवाच
श्रूयतां तात वक्ष्यामि सारभूतं तवाज्ञया।
समाहितमना भूत्वा यन्मे चेतस्यवस्थितम्॥ १४॥
अनुवाद
प्रह्लाद ने कहा, "पिताजी! आपकी आज्ञा से मैं अपने मन की सारी बातें आपको बता रहा हूँ। कृपया ध्यानपूर्वक सुनिए।"
Prahlada said, "Father! As per your command I am telling you the gist of everything that is in my mind. Please listen carefully."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×