vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित
»
श्लोक 12
श्लोक
1.17.12
पादप्रणामावनतं तमुत्थाप्य पिता सुतम्।
हिरण्यकशिपु: प्राह प्रह्लादममितौजसम्॥ १२॥
अनुवाद
तब अपने चरणों में प्रणाम करनेवाले अत्यंत तेजस्वी पुत्र प्रह्लाद को उठाकर पिता हिरण्यकशिपु ने कहा॥12॥
Then raising his extremely illustrious son Prahlada who was bowing at his feet, father Hiranyakashipu said॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×