vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
»
श्लोक 97
श्लोक
1.15.97
विवर्द्धयिषवस्ते तु शबलाश्वा: प्रजा: पुन:।
पूर्वोक्तं वचनं ब्रह्मन्नारदेनैव नोदिता:॥ ९७॥
अनुवाद
वे शबलश्वगण भी प्रजा की संख्या बढ़ाना चाहते थे, परंतु हे ब्राह्मण! नारदजी ने उनसे पुनः उपरोक्त बातें कहीं।
Those Shabalashwagan also wanted to increase the number of people, but O Brahmin! Naradji again told him the above mentioned things.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×