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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 91
श्लोक
1.15.91
तान्दृष्ट्वा नारदो विप्र संविवर्द्धयिषून्प्रजा:।
सङ्गम्य प्रियसंवादो देवर्षिरिदमब्रवीत्॥ ९१॥
अनुवाद
उसे प्रजा बढ़ाने की इच्छा रखते देख मधुरभाषी नारद मुनि उसके पास गए और इस प्रकार बोले - ॥91॥
Seeing him desirous of increasing the population, the sweet-talking sage Narada went near him and said this - ॥91॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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