श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  1.15.84 
कानिष्ठॺं ज्यैष्ठॺमप्येषां पूर्वं नाभूद‍‍्द्विजोत्तम।
तप एव गरीयोऽभूत्प्रभावश्चैव कारणम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! पहले उनमें न तो वरिष्ठता थी और न ही कनिष्ठता। उस समय तप और प्रभाव ही उनकी वरिष्ठता का कारण थे।
 
O best of the two! Earlier there was no seniority or juniority among them. At that time penance and influence were the reason for their seniority. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)