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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 83
श्लोक
1.15.83
युगे युगे भवन्त्येते दक्षाद्या मुनिसत्तम।
पुनश्चैवं निरुद्धॺन्ते विद्वांस्तत्र न मुह्यति॥ ८३॥
अनुवाद
हे महामुनि! ये दक्ष (दीक्षाएँ) आदि युगों तक होती हैं और फिर लुप्त हो जाती हैं; इसमें विद्वानों को कोई संदेह नहीं है ॥ 83॥
O great sage! These Dakshas (initiations) etc. take place for ages and then vanish; the learned have no doubt about this. ॥ 83॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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