श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.15.82 
श्रीपराशर उवाच
उत्पत्तिश्च निरोधश्च नित्यो भूतेषु सर्वदा।
ऋषयोऽत्र न मुह्यन्ति ये चान्ये दिव्यचक्षुष:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मैत्रेय! जीवों की उत्पत्ति और प्रलय निरन्तर होता रहता है। ऋषिगण तथा अन्य दिव्यदर्शी पुरुष इस विषय में आसक्ति नहीं रखते ॥82॥
 
Shri Parasharji said – O Maitreya! The creation and destruction of living beings [flow] occurs continuously. The sages and other clairvoyant men have no attachment in this matter. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)