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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 81
श्लोक
1.15.81
एष मे संशयो ब्रह्मन्सुमहान्हृदि वर्त्तते।
यद्दौहित्रश्च सोमस्य पुन: श्वशुरतां गत:॥ ८१॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! मेरे हृदय में बड़ा संदेह है कि सोमदेव का पौत्र होते हुए भी वे उनके ससुर कैसे हुए?॥81॥
O Brahman! There is a great doubt in my heart that despite being the grandson of Somdev, he became his father-in-law! ॥ 81॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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