श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 75-76
 
 
श्लोक  1.15.75-76 
स तु दक्षो महाभागस्सृष्टॺर्थं सुमहामते।
पुत्रानुत्पादयामास प्रजासृष्टॺर्थमात्मन:॥ ७५ ॥
अवरांश्च वरांश्चैव द्विपदोऽथ चतुष्पदान्।
आदेशं ब्रह्मण: कुर्वन् सृष्टॺर्थं समुपस्थित:॥ ७६ ॥
 
 
अनुवाद
हे महामते! उस महाभाग दक्ष ने ब्रह्माजी की आज्ञा मानकर सृष्टि की रचना में तत्पर होकर अपनी सृष्टि की वृद्धि करने तथा सन्तान उत्पन्न करने के लिए पुत्ररूपी, नीच, उच्च, द्विपाद, चतुर्भुज आदि नाना प्रकार के जीवों की रचना की ॥75-76॥
 
O Mahamate! That Mahabhaga Daksha, obeying the orders of Lord Brahma and being ready to create the universe, created various types of living beings in the form of sons, low, high, bipedal, quadrupedal, etc., in order to increase his own creation and to give birth to children. 75-76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)