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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 7
श्लोक
1.15.7
रत्नभूता च कन्येयं वार्क्षेयी वरवर्णिनी।
भविष्यज्जानता पूर्वं मया गोभिर्विवर्द्धिता॥ ७॥
अनुवाद
भविष्य को जानकर मैंने वृक्षों से उत्पन्न हुई इस सुन्दर वर्ण वाली, रत्नरूपी कन्या को अपनी [अमृतरूपी] किरणों से पाला है।
Knowing the future, I have nurtured this beautiful complexioned, gem-like girl born from trees with my [nectar-like] rays.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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