श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.15.67 
सोम उवाच
तयैवमुक्तो देवेशो हृषीकेश उवाच ताम्।
प्रणामनम्रामुत्थाप्य वरद: परमेश्वर:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
सोम ने कहा - उसके ऐसा कहने पर वर देने वाले भगवान् तथा भगवान् श्री हृषिकेश ने उस कन्या को जो दण्डवत् प्रणाम करने के लिए झुकी हुई थी, उठाकर कहा ।।67।।
 
Som said - When she said so, the boon-giving God and Lord Sri Hrishikesh lifted the girl who was bowing down to pay obeisance and said. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)