श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.15.60 
[ इमं स्तवं य: पठति शृणुयाद्वापि नित्यश:।
स कामदोषैरखिलैर्मुक्त: प्राप्नोति वाञ्छितम्॥]
इयं च मारिषा पूर्वमासीद्या तां ब्रवीमि व:।
कार्यगौरवमेतस्या: कथने फलदायि व:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
[जो मनुष्य इस स्तोत्र को नियमित रूप से पढ़ता या सुनता है, वह काम आदि समस्त दोषों से मुक्त होकर मनोवांछित फल प्राप्त करता है।] अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि यह मारिषा पूर्वजन्म में कौन थी। ऐसा कहने से तुम्हारे कार्य का यश सफल होगा। [अर्थात् तुम जनसंख्या वृद्धि रूपी फल को प्राप्त कर सकोगे।]॥60॥
 
[The person who regularly reads or listens to this hymn gets free from all the defects like lust etc. and gets the desired result.] Now I will tell you who this Marisha was in her previous birth. By telling this, the glory of your work will be successful. [That is, you will be able to get the fruit in the form of increase in population.]॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)