श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.15.59 
एतद‍्ब्रह्मपराख्यं वै संस्तवं परमं जपन्।
अवाप परमां सिद्धिं स तमाराध्य केशवम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्मपर' नामक इस परम स्तोत्र का जप करके तथा भगवान केशव की पूजा करके उस मुनि ने परम सिद्धि प्राप्त की। 59.
 
By chanting this supreme hymn called 'Brahmapara' and worshipping Lord Keshav, that sage attained supreme success. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)