श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.15.56 
स कारणं कारणतस्ततोऽपि
तस्यापि हेतु: परहेतुहेतु:।
कार्येषु चैवं सह कर्मकर्तृ-
रूपैरशेषैरवतीह सर्वम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
वह तामस अहंकार का भी परम कारण है और उसका भी प्रधान है और इस प्रकार वह सम्पूर्ण कर्मों और कर्ता आदि सहित कर्मरूप में स्थित सम्पूर्ण जगत् का पालन करता है॥ 56॥
 
He is the ultimate cause of the cause (Panchabhoot)-of-the-cause (Panchatanmatra)-of-the-cause (Tamas-Ahankar) and the cause (Mahattattva)-of-the-cause (Pradhan)-of-that-and in this way He looks after the entire world which is situated in the form of action including all the actions and the doer etc.॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)