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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 51
श्लोक
1.15.51
कण्डोरपत्यमेवं सा वृक्षेभ्यश्च समुद्गता।
ममापत्यं तथा वायो: प्रम्लोचातनया च सा॥ ५१॥
अनुवाद
वह कन्या जो वृक्षों से उत्पन्न हुई है, वह प्रम्लोचा की पुत्री है तथा कण्डु ऋषि, मेरी और वायु की भी संतान है। 51.
That girl, thus born from the trees, is the daughter of Pramlocha and is also the child of the sage Kandu, me and Vayu. 51.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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