श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.15.49 
तं वृक्षा जगृहुर्गर्भमेकं चक्रे तु मारुत:।
मया चाप्यायितो गोभि: स तदा ववृधे शनै:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वृक्षों ने उस भ्रूण को ग्रहण किया, वायु ने उसे ग्रहण किया और मैं अपनी किरणों से उसका पोषण करने लगा। इससे वह धीरे-धीरे बढ़ता गया ॥49॥
 
The trees accepted that embryo, the air collected it and I started nourishing it with my rays. Due to this, it gradually grew. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)