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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 48
श्लोक
1.15.48
ऋषिणा यस्तदा गर्भस्तस्या देहे समाहित:।
निर्जगाम स रोमाञ्चस्वेदरूपी तदङ्गत:॥ ४८॥
अनुवाद
उस समय ऋषि ने जो गर्भ उसके शरीर में स्थापित किया था, वह भी उत्तेजना के कारण उत्पन्न पसीने के रूप में उसके शरीर से बाहर निकल आया ॥48॥
At that time the womb which the sage had implanted in her body also came out of her body in the form of sweat caused by excitement. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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