श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.15.45 
प्रवेपमानां सततं स्विन्नगात्रलतां सतीम्।
गच्छ गच्छेति सक्रोधमुवाच मुनिसत्तम:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जिसका सारा शरीर पसीने से भीगा हुआ था और जो भय से काँप रही थी, उस प्रम्लोचा से महामुनि कण्डु ने क्रोधपूर्वक कहा - 'अरे! तू चली जा! चली जा!!॥ 45॥
 
To Pramlocha, whose entire body was drenched in sweat and who was trembling with fear, the great sage Kandu angrily said - 'Hey! You go away! Go away!!॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)