श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.15.4 
उन्मूलानथ तान‍्वृक्षान‍्कृत्वा वायुरशोषयत्।
तानग्निरदहद्घोरस्तत्राभूद्‍द्रुमसङ्क्षय:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वायु ने वृक्षों को उखाड़कर सुखा दिया और प्रचण्ड अग्नि ने उन्हें जला दिया। इस प्रकार उस समय वृक्ष नष्ट होने लगे ॥4॥
 
The wind uprooted the trees and dried them up and the fierce fire burnt them. Thus the trees began to perish at that time. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)