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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 29
श्लोक
1.15.29
इयं च वर्तते सन्ध्या परिणाममहर्गतम्।
उपहास: किमर्थोऽयं सद्भाव: कथ्यतां मम॥ २९॥
अनुवाद
अब दिन ढल गया है और संध्या हो गई है, तब मुझे सच-सच बता, तू इस प्रकार मेरा उपहास क्यों कर रहा है?॥29॥
Now the day is over and it is evening time. Then tell me the truth, why are you mocking me like this?॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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