श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.15.28 
मुनिरुवाच
प्रातस्त्वमागता भद्रे नदीतीरमिदं शुभम्।
मया दृष्टासि तन्वङ्गि प्रविष्टासि ममाश्रमम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले, "प्रिय महिला! आप आज सुबह ही इस सुंदर नदी तट पर आई हैं। [मुझे अच्छी तरह याद है] मैंने आपको आज ही अपने आश्रम में प्रवेश करते देखा था।" 28.
 
The sage said, "Dear lady! You have come to this beautiful river bank only this morning. [I remember very well] I saw you entering my hermitage only today." 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)