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vishnu 1.15.23: और जैसे-जैसे वह महान ऋषि भी अपने कामातुर मन से दिन-रात उससे प्रेम करते रहे, वैसे-वैसे उनका प्रेम भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही गया।   |   vishnu अध्याय 1.15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.15.23 
तया च रमतस्तस्य परमर्षेरहर्निशम्।
नवं नवमभूत्प्रेम मन्मथाविष्टचेतस:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
और जैसे-जैसे वह महान ऋषि भी अपने कामातुर मन से दिन-रात उससे प्रेम करते रहे, वैसे-वैसे उनका प्रेम भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही गया।
 
And as that great sage too kept making love to her day and night with his lusty mind, his love for her kept increasing every day. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)