श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.15.2 
नाशकन्मरुतो वातुं वृतं खमभवद्‍द्रुमै:।
दशवर्षसहस्राणि न शेकुश्चेष्टितुं प्रजा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
आकाश वृक्षों से भर गया, इसलिए दस हजार वर्षों तक न तो वायु चली और न ही मनुष्य कोई कार्य कर सके॥2॥
 
The sky was filled with trees. Therefore for ten thousand years neither the wind blew nor the people could do any kind of activity.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)