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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 155
श्लोक
1.15.155
समचेता जगत्यस्मिन्य: सर्वेष्वेव जन्तुषु।
यथात्मनि तथान्येषां परं मैत्रगुणान्वित:॥ १५५॥
अनुवाद
जो इस संसार में समस्त प्राणियों के प्रति समभाव रखते थे और दूसरों के प्रति भी अपने समान ही अपार प्रेम रखते थे ॥155॥
Who was equal towards all creatures in this world and had immense love for others as much as for himself. ॥ 155॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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