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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 154
श्लोक
1.15.154
दैत्येन्द्रसूदोपहृतं यस्य हालाहलं विषम्।
जरयामास मतिमानविकारममत्सरी॥ १५४॥
अनुवाद
जिन्होंने बुद्धिमान् और ईर्ष्यारहित होकर दैत्यराज के रसोइयों द्वारा लाए गए हलाहल नामक विष को बिना किसी भावना के पचा लिया। 154.
Who, wise and without any jealousy, digested without any emotion the poison called Halahal brought by the cooks of the king of demons. 154.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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