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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 153
श्लोक
1.15.153
शम्बरस्य च मायानां सहस्रमतिमायिन:।
यस्मिन्प्रयुक्तं चक्रेण कृष्णस्य वितथीकृतम्॥ १५३॥
अनुवाद
अत्यन्त मायावी शम्बरासुर की हजारों मायाएँ श्रीकृष्णचन्द्र के चक्र से निष्फल हो गईं ॥153॥
Thousands of illusions of the extremely illusive Shambarasur used on him were rendered useless by the Chakra of Shri Krishna Chandra. 153॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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