श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  1.15.150 
यस्य संशोषको वायुर्देहे दैत्येन्द्रयोजित:।
अवाप सङ्क्षयं सद्यश्चित्तस्थे मधुसूदने॥ १५०॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीमधुसूदन के मन में स्थित होने के कारण दैत्यराज ने जो वायु सबको शोषित करने के लिए नियुक्त की थी, वह उनके शरीर में प्रवेश करते ही शान्त हो गई ॥150॥
 
Due to the presence of Lord Shrimadhusudan in the mind, the Vayu, which was appointed by the demon king to exploit everyone, calmed down when it entered his body. 150॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)