श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  1.15.146 
न भिन्नं विविधै: शस्त्रैर्यस्य दैत्येन्द्रपातितै:।
शरीरमद्रिकठिनं सर्वत्राच्युतचेतस:॥ १४६॥
 
 
अनुवाद
जिसका शरीर पर्वत के समान कठोर है और चारों ओर भगवान् का प्रतिबिम्ब विद्यमान होने के कारण दैत्यराज के अस्त्र-शस्त्रों से भी नहीं फटा ॥146॥
 
Whose body is as hard as a mountain and due to the presence of God's reflection all around, was not even torn apart by the weapons used by the king of demons. ॥ 146॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)