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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 143
श्लोक
1.15.143
तेषां मध्ये महाभाग सर्वत्र समदृग्वशी।
प्रह्लाद: परमां भक्तिं य उवाच जनार्दने॥ १४३॥
अनुवाद
हे महाभाग! उनमें से प्रह्लादजी सर्वज्ञ और जितेन्द्रिय थे, जिन्होंने भगवान् श्रीविष्णु की परम भक्ति का वर्णन किया था ॥143॥
O Mahabhaga! Among them, Prahladji was omniscient and Jitendriya, who had described the supreme devotion of Lord Shri Vishnu. 143॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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