श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  1.15.142 
हिरण्यकशिपो: पुत्राश्चत्वार: प्रथितौजस:।
अनुह्लादश्च ह्लादश्च प्रह्लादश्चैव बुद्धिमान्।
संह्लादश्च महावीर्या दैत्यवंशविवर्द्धना:॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु के अत्यन्त तेजस्वी एवं पराक्रमी अनुह्लाद, ह्लाद, बुद्धिमान प्रह्लाद और संह्लाद नाम के चार पुत्र हुए जो राक्षस वंश की वृद्धि करने वाले थे ॥142॥
 
Hiranyakashipu had four sons named very bright and mighty Anuhlad, Hlad, intelligent Prahlad and Sanhlad who were to increase the demon dynasty. 142॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)