श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.15.14 
तं सा प्राह महाभाग गन्तुमिच्छाम्यहं दिवम्।
प्रसादसुमुखो ब्रह्मन्ननुज्ञां दातुमर्हसि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब हे महामुनि! एक दिन उस अप्सरा ने ऋषि कण्डु से कहा - "हे ब्रह्मन्! अब मैं स्वर्ग जाना चाहती हूँ, कृपया मुझे प्रसन्नतापूर्वक अनुमति प्रदान करें।"॥14॥
 
Then, O great one! One day that Apsara said to Sage Kandu - "O Brahman! Now I want to go to heaven, please give me permission happily."॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)