श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  1.15.136 
प्रत्यङ्गरसजा:श्रेष्ठा ऋचो ब्रह्मर्षिसत्कृता:।
कृशाश्वस्य तु देवर्षेर्देवप्रहरणा: स्मृता:॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षियों द्वारा लिखे हुए उत्तम श्लोकोंका अभिमान करनेवाले देवता प्रत्यंगिरासे उत्पन्न होते हैं और शास्त्रोंका अभिमान करनेवाले देवप्रहरण नामक देवता देवर्षि कृशाश्वकी संतान कहे गए हैं ॥136॥
 
The god who is proud of the good verses written by Brahmarishis is born from Pratyangira and the gods named Devpraharan who are proud of the scriptures are said to be the children of Devarshi Krishashwa. 136॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)